श्री श्री १००८ श्री परम पूज्य मां अन्नपूर्णा जी आज से १००२ साल पहले विक्रम शवत १०७४वर्षे ११वि शताब्दी ग्राम रूचियार मे जाती चौधरी ( कलबी ) ओड़ गौत्र मे पिता श्री मोडवलजी के घर में माता अन्नपूर्णा अवतरित हुई पूर्व जन्म संस्कार वश उनके आदर्श भारतीय नारी एवं परम योगिनी के सभी गुण जन्म से ही मोजुद प्राप्त थे । और बचपन का ना अन्नु था! बाई अन्नु का बाल विवाह ग्राम कत्रोसन मे बोका गौत्र के बालक के साथ हुआ था जीस बालक का जन्म कत्रोसण के धुणी वाले (परम पूज्य योगीराज श्री नारायण भारती) नागाजी के सशर्त वरदान से हुआ था । अत:वे उनके शिष्य बनकर दामोदर भारती हो गये। सावन की तीज का त्यौहार मनाने अपनी सखियों के साथ गाँव के छोटे से तालाब मे फुल और दिपक तराने गई वहा अपनी सखियों द्वारा पती के सन्यास ग्रहण का ताना मारा ताना सुन बाई अन्नु को वैराग विचलित हो गई परिवार के लोगों ने और अपने माता पिता ने बहोत समजाने की कोशिष कही लेकिन बाई अन्नु ऐक नही मानी हठ पूर्वक धुणी वाले नागाजी के श्री चरणों मे उपस्थित हो गई उनकी ही शिष्या अन्नपूर्णा भारती बन गई पति चरणानुगामि गई तथा गुरु सेवा के साथ साथ योग साधना में रत रहने लगी
विक्रम संवत ११०१ वैशाख शुक्ल पक्ष ३ को अपने गुरूजी के निर्देशन मे कवारी जगह देक कर मंठ की संस्थापना एवं भगवान श्री शिलेश्वर महादेव मंदिर निर्माण करवाया और आपका महतपूर्व योगदान रहा।
दूसरे महन्त श्री दामोदर भारती के कार्यकाल
मे बादशाह अलशमत के सुबेदार को अपनी योग सिद्धी(परचा) देकर नतमस्तक कीया इस क्षेत्र में गौ हत्या बन्द करवाई सूबेदार द्वारा ५०० हल की जमीन भेट १०८ गाँवो के गुरु द्वारा की मान्यता सविकार करने के साथ-साथ आम जनता के सहयोग से अन्नक्षेत्र की परिपाटी (कटाला ) कायम कीया।
अपनी योग साधना के साथ-साथ ३५१ वर्ष तक मठ के विकास मे अपना अविस्मरणीय योगदान रहा। चौथे महन्त श्री १००८ जयदेव भारती के कार्यकाल मे विक्रम संवत १४२५ भादवा सुद १४ को योगमार्ग द्वारा जीवित समाधि लेकर कैलाश धाम पधार गये।आप नित्य पूजनीय एवं वंन्दनीय है ।
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राण बल्लभे।
,ज्ञान वैराग्य सिद्धर्थं भिक्षां देहि च पार्वती।।
शिष्या दम्पति प्राप्तो निम्नोनारायण स्य चां ।
माता श्री अन्नपूर्णा चं श्री दामोदर भारती ।।
सिद्धात तुभौ तपोमॆध्य माता सिद्ध विशेषतं: ।
तपस्या तप प्रभावेण मठ परन्याती भागत।।
श्री परम पूज्य मॉं पार्वती स्वरूप मॉं अन्नपूर्णा जी की 657 वी पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन प्रणाम 🙏🚩💐💐