रेत के कण-कण में इतिहास बसता है,
खेतलावास की मिट्टी में स्वाभिमान सजता है।
जहाँ सूरज भी हल की धार से उजाला सीखे,
वहीं किसान का पसीना सोना बन के दिखे।
माटी से रिश्ता, माटी सा स्वभाव,
कम बोलते हैं लोग, पर रखते हैं असरदार भाव।
छपरों में सपने, आँखों में आस,
खेतलावास जीता है मेहनत का विश्वास।
यहाँ गौ-माता की सेवा है धर्म,
यहाँ रिश्तों में नहीं कोई झूठा कर्म।
दुख में कंधा, सुख में साथ,
यही खेतलावास की असली बात।
आंधी आए या सूखा पड़ जाए,
किसान फिर भी हार न मान पाए।
हल की लकीरों में भविष्य लिखते,
अपने पसीने से इतिहास रचते।
गर्व है मुझे उस गाँव की शान पर,
जो टिका है सच्चाई और सम्मान पर।
खेतलावास—सिर्फ़ नाम नहीं पहचान है,
यह मेरी जड़, मेरा अभिमान है।
— जगदीश आंजणा खेतलावास
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