विक्रम संवत ११०१ वैशाख शुक्ल पक्ष ३ को अपने गुरूजी के निर्देशन मे कवारी जगह देक कर मंठ की संस्थापना एवं भगवान श्री शिलेश्वर महादेव मंदिर निर्माण करवाया और आपका महतपूर्व योगदान रहा।
दूसरे महन्त श्री दामोदर भारती के कार्यकाल
मे बादशाह अलशमत के सुबेदार को अपनी योग सिद्धी(परचा) देकर नतमस्तक कीया इस क्षेत्र में गौ हत्या बन्द करवाई सूबेदार द्वारा ५०० हल की जमीन भेट १०८ गाँवो के गुरु द्वारा की मान्यता सविकार करने के साथ-साथ आम जनता के सहयोग से अन्नक्षेत्र की परिपाटी (कटाला ) कायम कीया।
अपनी योग साधना के साथ-साथ ३५१ वर्ष तक मठ के विकास मे अपना अविस्मरणीय योगदान रहा। चौथे महन्त श्री १००८ जयदेव भारती के कार्यकाल मे विक्रम संवत १४२५ भादवा सुद १४ को योगमार्ग द्वारा जीवित समाधि लेकर कैलाश धाम पधार गये।आप नित्य पूजनीय एवं वंन्दनीय है ।
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राण बल्लभे।
,ज्ञान वैराग्य सिद्धर्थं भिक्षां देहि च पार्वती।।
शिष्या दम्पति प्राप्तो निम्नोनारायण स्य चां ।
माता श्री अन्नपूर्णा चं श्री दामोदर भारती ।।
सिद्धात तुभौ तपोमॆध्य माता सिद्ध विशेषतं: ।
तपस्या तप प्रभावेण मठ परन्याती भागत।।



